लेडीज डॉन नटवरलाल: फर्जी नामों का मायाजाल और खाकी की खामोशी

 

विशेष रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी, ब्यूरो चीफ, कानपुर

उन्नाव/कानपुर: उत्तर प्रदेश में जहाँ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत बड़े-बड़े माफियाओं के अवैध साम्राज्य मिट्टी में मिलाए जा रहे हैं, वहीं उन्नाव में एक ‘लेडीज नटवरलाल’ ने पुलिस और प्रशासन की नाक में दम कर रखा है। मामला कथित अधिवक्ता अलीशा अंसारी का है, जिस पर दोहरी पहचान, फर्जी दस्तावेज और न्यायपालिका को गुमराह करने के बेहद संगीन आरोप लगे हैं।

पाँच नाम, अनगिनत चेहरे: क्या है पहचान का सच?

आरोपी महिला ने कानून की आँखों में धूल झोंकने के लिए नामों का एक ऐसा मकड़जाल बुना है कि पुलिस भी चकरा जाए। जाँच और शिकायतों के अनुसार, एक ही महिला अलग-अलग मुकदमों और स्थानों पर इन नामों का उपयोग कर रही है:

अलीशा: चोरी के मामले में।

फिरदौस परवीन: फर्जी वकालत के खेल में।

पूनम यादव: कानपुर नगर के दर्ज मुकदमे में।

आक्सा अंसारी: नजीराबाद (कानपुर) में देह व्यापार के मुकदमे में।

अलीशा अंसारी/फिरदौस परवीन: फर्जी तरीके से दस्तावेजों के संशोधन में।

दोहरा रजिस्ट्रेशन: बार काउंसिल के नियमों की धज्जियाँ

एक अधिवक्ता के लिए बार काउंसिल का एक ही रजिस्ट्रेशन मान्य होता है, लेकिन यहाँ कानून को ही बंधक बना लिया गया है। कथित महिला वकील द्वारा दो अलग-अलग रजिस्ट्रेशन नंबरों का उपयोग किया जा रहा है:

1364/2020

UP02898/2020

हैरत की बात यह है कि उन्नाव की सीजेएम कोर्ट में दाखिल वकालतनामों में कथित तौर पर फर्जी मोहरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सवाल यह है कि कोर्ट परिसर के भीतर इतना बड़ा फर्जीवाड़ा किसकी शह पर फल-फूल रहा है?

आजम खान को जेल, तो अलीशा को ‘कवच’ क्यों?

कानून की समानता पर सवाल उठाते हुए स्थानीय स्तर पर भारी रोष है। बीते 17 नवंबर 2025 को जब रामपुर की अदालत ने समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान और उनके बेटे को दोहरे पैन कार्ड और जाली दस्तावेजों के लिए 7 साल की सजा सुनाई, तो फिर उसी प्रकृति के अपराध के लिए अलीशा अंसारी को ‘कवच’ क्यों दिया जा रहा है?

बड़ा सवाल: क्या उन्नाव पुलिस के लिए कानून के पैमाने बदल गए हैं? क्या सत्ता या किसी रसूखदार का संरक्षण इस ‘लेडीज नटवरलाल’ की ढाल बना हुआ है?

धाराओं का उल्लंघन और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल

भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 (दस्तावेजों की कूटरचना) के तहत यह अपराध 10 साल तक की सजा के दायरे में आता है। इसके बावजूद:

उन्नाव पुलिस अधीक्षक आखिर इन पांच नामों के खुलासे पर खामोश क्यों हैं?

फर्जी आईडी और दोहरे रजिस्ट्रेशन का संज्ञान लेकर अब तक अभियोग पंजीकृत क्यों नहीं हुआ?

संगीन धाराओं के उल्लंघन के बावजूद महिला अब तक गिरफ्त से दूर क्यों है?

साख पर बट्टा

यह मामला सिर्फ एक महिला की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी कानूनी व्यवस्था और पुलिस प्रशासन की साख का सवाल है। अगर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर धन उगाही और अदालती कार्यवाही को प्रभावित करने वाली इस महिला पर शिकंजा नहीं कसा गया, तो ‘न्याय’ शब्द से आम जनता का भरोसा उठना लाजिमी है।

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Author: India Varta News

Mohit Chakraborty is the Founder and Editor-in-Chief of India Varta News. He is actively involved in journalism and social service from Fatehpur, Uttar Pradesh. His mission is to deliver unbiased, factual, and public-interest journalism while highlighting local, regional, and national issues. He believes that media is a powerful tool for positive social change.

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