कानपुर: 50 हजार की खटपट ने खोला करोड़ों का ‘किडनी कांड’, डॉक्टर दंपति समेत पूरा सिंडिकेट बेनकाब

 

रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी (ब्यूरो चीफ, कानपुर)

कानपुर। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक शहर कानपुर में मानवता को शर्मसार करने वाले एक बड़े किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। करोड़ों रुपये के इस काले कारोबार की परतें किसी बड़ी जांच से नहीं, बल्कि महज 50 हजार रुपये के लेनदेन के विवाद के कारण खुलीं। पुलिस की इस कार्रवाई ने स्वास्थ्य जगत और प्रशासन के बीच हड़कंप मचा दिया है।

एक शिकायत और गिर गया माफिया का किला

इस पूरे गोरखधंधे का खुलासा तब हुआ जब बिहार (समस्तीपुर) के रहने वाले और मेरठ में एमबीए (MBA) की पढ़ाई कर रहे एक छात्र ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाई। आर्थिक तंगी से जूझ रहे इस छात्र ने अपनी किडनी 10 लाख रुपये में बेचने का सौदा किया था। ऑपरेशन के बाद जब उसे तय रकम से 50 हजार रुपये कम मिले, तो ठगी से नाराज छात्र ने सीधे पुलिस की शरण ली और माफिया का पूरा कच्चा चिट्ठा खोल दिया।

मुनाफे का गणित: डोनर को ‘कौड़ियाँ’, गिरोह को ‘करोड़’

पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। यह गिरोह बेहद शातिराना तरीके से काम कर रहा था:

डोनर की खरीद: गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को 8 से 10 लाख रुपये का लालच देकर तैयार किया जाता था।

मरीजों से लूट: जरूरतमंद मरीजों के परिजनों से एक किडनी के बदले 60 से 90 लाख रुपये तक वसूले जाते थे।

मुनाफा: एक अकेले ट्रांसप्लांट से यह गिरोह 50 लाख रुपये तक की अवैध कमाई करता था।

अस्पताल बना ‘मंडी’, डॉक्टर दंपति गिरफ्तार

पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए एक निजी अस्पताल पर छापेमारी की और वहां से जुड़े डॉक्टर दंपति समेत कई दलालों और तकनीशियनों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया कि अस्पताल में बिना किसी वैधानिक अनुमति (NOC) के अवैध रूप से सर्जरी की जा रही थी। ऑपरेशन थिएटर में नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर केवल पैसों के लिए जिंदगियों से खिलवाड़ हो रहा था।

देशभर में फैला है जाल

जांच का दायरा अब कानपुर से बाहर निकल चुका है। सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह के तार दिल्ली, नोएडा और लखनऊ जैसे बड़े शहरों से जुड़े हैं। यह गिरोह सोशल मीडिया के माध्यम से आर्थिक रूप से मजबूर युवाओं और छात्रों को अपना शिकार बनाता था। पहचान छुपाने के लिए डोनर और रिसीवर को अलग-अलग गोपनीय ठिकानों पर रखा जाता था।

प्रशासनिक सख्ती और आगामी कार्रवाई

पुलिस ने संबंधित अस्पतालों के रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। फरार आरोपियों की तलाश में टीमें रवाना कर दी गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित अपराध है और इसमें शामिल किसी भी सफेदपोश को बख्शा नहीं जाएगा।

इंडिया वार्ता न्यूज़ (IVN) की विशेष टिप्पणी: > “गरीबों की मजबूरी को व्यापार बनाने वाला यह किडनी रैकेट हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों को उजागर करता है। क्या चंद रुपयों के लिए डॉक्टरी जैसा पवित्र पेशा अब कसाईखाने में तब्दील हो रहा है?”

 

 

India Varta News
Author: India Varta News

Mohit Chakraborty is the Founder and Editor-in-Chief of India Varta News. He is actively involved in journalism and social service from Fatehpur, Uttar Pradesh. His mission is to deliver unbiased, factual, and public-interest journalism while highlighting local, regional, and national issues. He believes that media is a powerful tool for positive social change.

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