कानपुर, उत्तर प्रदेश | ब्यूरो चीफ: राहुल द्विवेदी
कानपुर में मानवता को शर्मसार करने वाले किडनी रैकेट में हर दिन नए और रोंगटे खड़े कर देने वाले खुलासे हो रहे हैं। अब इस काले कारोबार से जुड़ा एक ऐसा वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। वीडियो में गिरोह के मुख्य आरोपी होटल के कमरे में नोटों की गड्डियों के ढेर के बीच बिस्तर पर लेटे नजर आ रहे हैं।
यह वीडियो इस बात का पुख्ता सबूत है कि इंसानी अंगों की तस्करी का यह खेल करोड़ों रुपये का है।
💰 नोटों की गड्डियां और अय्याशी का वीडियो
वायरल वीडियो में आरोपी बेड पर भारी मात्रा में नकदी फैलाकर बैठे दिख रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह पैसा उन गरीब लोगों की जिंदगी की कीमत है जिन्हें बहला-फुसाकर गिरोह के जाल में फंसाया गया था। इस संगठित गिरोह के तार कानपुर से लेकर दिल्ली और एनसीआर के कई बड़े अस्पतालों तक जुड़े होने की आशंका है।
🚗 परवेज शैफी: गिरोह का ‘लॉजिस्टिक्स मास्टरमाइंड’
जांच में सामने आया है कि गिरोह का सदस्य परवेज शैफी बेहद शातिर अपराधी है। वह दिल्ली से तथाकथित डॉक्टरों और विशेषज्ञों को कानपुर लाने के लिए लग्जरी गाड़ियों का इंतजाम करता था।
पुराना इतिहास: परवेज पहले भी लूट और डकैती जैसे जघन्य अपराधों में जेल की हवा खा चुका है।
🏥 आहूजा हॉस्पिटल में चल रही थी ‘मौत की मंडी’
कानपुर पुलिस ने हाल ही में आहूजा हॉस्पिटल में घेराबंदी कर इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। चौंकाने वाली बात यह है कि जिस वक्त पुलिस ने छापा मारा, उस समय अस्पताल के भीतर एक और अवैध किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी अंतिम चरण में थी।
⚠️ डॉक्टर नहीं, ‘झोलाछाप’ कर रहे थे ऑपरेशन
कानपुर पुलिस आयुक्त के मुताबिक, यह रैकेट न केवल अवैध था बल्कि जानलेवा भी था।
“गिरोह में शामिल लोग असली डॉक्टर नहीं थे। इनमें फिजियोथेरेपिस्ट, टेक्नीशियन और अन्य मेडिकल स्टाफ शामिल थे, जो खुद को विशेषज्ञ बताकर लोगों की जान से खिलवाड़ कर रहे थे।”
🧩 गिरोह का ‘मोडस ऑपरेंडी’ (काम करने का तरीका)
यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था:
गरीबों को निशाना: आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को रुपयों का लालच देकर फंसाना।
फर्जीवाड़ा: कागजों में फर्जी रिश्तेदार और मेडिकल दस्तावेज तैयार करना।
बड़ा झूठ: किडनी निकालने के ऑपरेशन को परिजनों के सामने ‘गॉलब्लैडर का ऑपरेशन’ बताकर छिपाना।
⚡ एक मौत और ढह गया साम्राज्य
इस गिरोह का पर्दाफाश करीब एक साल पहले एक महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शुरू हुआ। पुलिस ने जब कड़ियां जोड़ीं, तो गाजियाबाद और दिल्ली (NCR) के कुछ प्रतिष्ठित अस्पतालों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है।
🔍 अब आगे क्या?
कानपुर पुलिस की विशेष टीमें फिलहाल दिल्ली और गाजियाबाद में डेरा डाले हुए हैं। गिरोह के चार मुख्य आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही कुछ बड़े नाम और नामी अस्पतालों के चेहरे बेनकाब होंगे।
चेतावनी: अवैध अंग प्रत्यारोपण कानूनन अपराध है। किसी भी संदिग्ध मेडिकल गतिविधि की सूचना तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को दें।








