भूजल, खेती और गंगा नदी पर खतरे की आशंका, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश भी आए सामने
फतेहपुर। जनपद के बिंदकी तहसील अंतर्गत हरदौलपुर-चौडगरा क्षेत्र स्थित JSR Industries Pvt. Ltd. के खिलाफ पर्यावरण प्रदूषण को लेकर एक बार फिर शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि फैक्ट्री से निकलने वाले औद्योगिक अपशिष्ट जल का समुचित शोधन किए बिना उसे खुले नाले के माध्यम से पांडु नदी और आगे गंगा नदी में छोड़ा जा रहा है। साथ ही फैक्ट्री परिसर में बनाए जा रहे कथित सोख्ता पिट से भूजल प्रदूषित होने की आशंका भी जताई गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार, यदि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई तो क्षेत्र की कृषि भूमि, पेयजल स्रोत, पशु-पक्षियों, पेड़-पौधों और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में हुई जांच के दौरान उन्हें मौके पर नहीं बुलाया गया, जिससे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में क्या मिला?
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय ने आईजीआरएस शिकायत के आधार पर 23 फरवरी 2026 को औद्योगिक इकाई का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान ईटीपी (Effluent Treatment Plant) के आउटलेट से नमूना लेकर एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में परीक्षण कराया गया।
बताया गया है कि 6 मार्च 2026 की परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर बोर्ड ने पाया कि औद्योगिक अपशिष्ट जल निर्धारित पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप नहीं था। इसके बाद बोर्ड ने इकाई को ईटीपी को सुदृढ़ कर नियमित रूप से संचालित करने, एनएबीएल मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से जल एवं वायु गुणवत्ता की जांच कराकर रिपोर्ट उपलब्ध कराने, जल एवं वायु अधिनियम के तहत जारी सहमति (Consent) की शर्तों का पालन सुनिश्चित करने तथा निर्धारित समय में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
कंपनी का पक्ष आना बाकी
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि संबंधित औद्योगिक इकाई ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी निर्देशों का पूर्ण अनुपालन किया है या नहीं। इस मामले में कंपनी का आधिकारिक पक्ष भी अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।
प्रशासनिक स्तर पर मामले की निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों की बात सुनने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है।








