फतेहपुर। जनपद के मलवां ब्लॉक के बनियनखेड़ा, गोहरारी, आशापुर और अमरपुर गांवों में भू-गर्भ जल प्रदूषण का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण इन गांवों के जल स्रोतों में क्रोमियम, पारा एवं अन्य भारी धातुओं की मात्रा लगातार बढ़ने की बात सामने आई है। स्थिति यह है कि पिछले 12 वर्षों से ग्रामीण इस समस्या से जूझ रहे हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल सका है।
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में प्रभावित लोगों की संख्या 322 बताई गई थी, जबकि वर्ष 2026 में यह आंकड़ा बढ़कर 855 तक पहुंच गया है। स्वास्थ्य विभाग एवं एनजीटी में प्रस्तुत रिपोर्टों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि ग्रामीणों के शरीर में भारी धातुओं की मौजूदगी बढ़ी है, जिससे क्षेत्र में भय और चिंता का माहौल है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय औद्योगिक इकाइयों का रासायनिक अपशिष्ट गोहरारी स्थित डंप यार्ड में डाला जा रहा है, जिससे भू-गर्भ जल लगातार प्रदूषित हो रहा है। कई हैंडपंपों का पानी पीने योग्य नहीं रह गया है और लोगों को वैकल्पिक जल स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि वर्ष 2014 से ही प्रदूषित पानी के संकेत मिलने लगे थे। इसके बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, प्रदूषण के स्रोतों पर रोक लगाने तथा प्रभावित गांवों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यह जनस्वास्थ्य के लिए और गंभीर संकट का रूप ले सकती है। वहीं, प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
ग्रामीणों को अब उम्मीद है कि वर्षों से चली आ रही इस समस्या पर शासन-प्रशासन गंभीरता दिखाएगा और प्रभावित परिवारों को राहत दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।








