असोथर/फतेहपुर। विकास के दावों के बीच सरकंडी के मजरे नंदन बाबा का डेरा आज भी पक्की सड़क की बाट जोह रहा है। बारिश होते ही गांव का रास्ता कीचड़ से भर जाता है और आवागमन मुश्किल हो जाता है। मंगलवार की रात 60 वर्षीय रामदेव निषाद की मौत के बाद परिजनों को शव चारपाई पर रखकर कंधों के सहारे ले जाना पड़ा। इस घटना ने गांव की बदहाल सड़क व्यवस्था को एक बार फिर सामने ला दिया।
बताया गया कि रामदेव निषाद मंगलवार को अपने खेत में धान की फसल की निराई-गुड़ाई करने गए थे। शाम को घर लौटने के बाद रात में उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजनों ने बेटों को सूचना दी। बेटे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन करीब रात एक बजे रामदेव की मौत हो गई।
इसके बाद परिजनों और ग्रामीणों को शव घर से बाहर ले जाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। बारिश के कारण कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील था। ग्रामीणों ने चारपाई को कंधे पर उठाया और कीचड़ भरे रास्ते से शव को बाहर तक पहुंचाया। इस दौरान बनाए गए वीडियो में रास्ते की बदहाली साफ दिखाई दी।
ग्रामीणों का कहना है कि नंदन बाबा का डेरा में लंबे समय से पक्की सड़क की मांग की जा रही है। चुनाव के दौरान सड़क निर्माण के आश्वासन मिलते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद समस्या फिर जस की तस रह जाती है। ग्रामीणों के मुताबिक बरसात में स्थिति और गंभीर हो जाती है तथा एंबुलेंस सहित अन्य चार पहिया वाहन गांव तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीण मातादीन तिवारी, रजोल तिवारी, कल्लू तिवारी, सोनू निषाद, शंकर तिवारी, संतोष तिवारी, रामौतार, हरिश्चंद्र और विनय निषाद ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से गांव तक पक्की सड़क बनवाने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं, बल्कि बीमारी और आपात स्थिति में जीवन बचाने का माध्यम भी है।
रामदेव निषाद अपने पीछे पत्नी तेजनी देवी, तीन बेटे बाबू, मुन्ना व ज्ञान तथा तीन बेटियां रज्जी देवी, भोड़ा देवी और राजकुमारी छोड़ गए हैं। अंतिम संस्कार यमुना नदी किनारे तेलान बाबा घाट सरकंडी खास में किया गया। घटना के बाद परिवार में मातम है, वहीं ग्रामीणों में सड़क को लेकर नाराजगी बनी हुई है।








