मथुरा से गोकुल तक की कृष्ण लीला झांकियों में हुई साकार, जय श्रीकृष्ण के जयघोष से गूंजा पूरा गांव
आजमगढ़। महराजगंज विकासखंड के ग्रामसभा जमीलपुर में शनिवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। श्री राम-जानकी मंदिर सेवा समिति की ओर से लगातार छठे वर्ष भव्य शोभायात्रा निकाली गई। आकर्षक झांकियों, भक्ति गीतों और श्रीकृष्ण के जयघोष से गांव का माहौल पूरी तरह भक्तिमय नजर आया।
शोभायात्रा का शुभारंभ श्री बैजनाथ सिंह के आवास से बाल गोपाल के पूजन, मंगल आरती, शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ। यात्रा में भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साथ वासुदेव द्वारा नवजात कृष्ण को मथुरा से गोकुल पहुंचाने की कथा को झांकियों के जरिए प्रस्तुत किया गया। बाल कृष्ण के रूप में सजे बच्चों ने लोगों का विशेष ध्यान खींचा।
यात्रा के रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने आरती उतारी और पुष्पवर्षा कर झांकियों का स्वागत किया। महिलाओं, बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी ने आयोजन को खास बना दिया। चारों ओर गूंजते ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से माहौल आध्यात्मिक रंग में रंगा रहा।
शोभायात्रा के श्री राम-जानकी कुटी पहुंचने पर बाल गोपाल को विधि-विधान से विराजमान कराया गया। इसके बाद मंगल आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।
कई माह की तैयारी से साकार हुआ आयोजन
शोभायात्रा को भव्य रूप देने के लिए समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने कई माह पहले से तैयारियां शुरू कर दी थीं। समिति अध्यक्ष अलंकार कौशिक, सचिव दुर्गेश कौशिक, सह सचिव मनोज सेठ और कोषाध्यक्ष सीताराम सिंह सहित पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने आयोजन की व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ग्रामवासियों ने भी श्रम, समय और आर्थिक सहयोग देकर आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया।
समिति के सचिव दुर्गेश कौशिक ने कहा कि कृष्ण जन्मोत्सव केवल धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि समाज को एकजुट करने और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ने का अवसर है। उन्होंने कहा कि सामूहिक सहयोग से लगातार छठे वर्ष यह आयोजन संभव हुआ है और आगे भी धार्मिक परंपराओं को इसी तरह आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
आयोजन में जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों, संत-महात्माओं और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी रही। सामूहिक सहभागिता से जमीलपुर में आयोजित कृष्ण जन्मोत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत की मजबूत तस्वीर पेश की।








