26 महीने से जारी संघर्ष को तेज करने का ऐलान, BUDS एक्ट के तहत भुगतान की उठी मांग; ‘भुगतान करो या सत्ता छोड़ो’ के नारे से गूंजा अधिवेशन
फतेहपुर। चिटफंड कंपनियों में जमा धनराशि वापस पाने के लिए संघर्ष कर रहे निवेशकों की आवाज रविवार को फतेहपुर में बुलंद हुई। नहर कॉलोनी परिसर में पीड़ित जमाकर्ता परिवार के बैनर तले राष्ट्रीय अधिवेशन आयोजित किया गया। सुबह 11 बजे शुरू हुए इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सहित देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। अधिवेशन में निवेशकों की लंबित धनराशि वापस कराने, दावों के निस्तारण में तेजी लाने और आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करने की रणनीति पर चर्चा की गई।
BUDS एक्ट के तहत भुगतान सुनिश्चित करने की मांग
अधिवेशन में वक्ताओं ने अनियमित जमा योजनाओं पर रोक लगाने से संबंधित बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड डिपॉजिट स्कीम्स एक्ट, 2019 (BUDS Act) का उल्लेख करते हुए निवेशकों को कानूनी प्रक्रिया के तहत राहत दिलाने की मांग उठाई।
आयोजकों के मुताबिक, निवेशकों की ओर से भुगतान के लिए विभिन्न स्तरों पर बड़ी संख्या में दावा फॉर्म जमा किए जा चुके हैं, लेकिन कई लोगों को अब तक उनकी जमा पूंजी वापस नहीं मिली है। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से भुगतान की प्रतीक्षा कर रहे परिवार आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
प्रतिनिधियों ने केंद्र और राज्य सरकारों से मांग की कि पात्र निवेशकों के दावों की जांच कर संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार भुगतान की प्रक्रिया तेज की जाए। साथ ही लंबित मामलों के निस्तारण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
आठ राज्यों के प्रतिनिधियों ने उठाई आवाज
राष्ट्रीय अधिवेशन में उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा, उत्तराखंड, महाराष्ट्र और गुजरात सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि निवेशकों की समस्याओं का समाधान कराने के लिए संगठित प्रयास जरूरी हैं।
अधिवेशन में विभिन्न संगठनों को एक मंच पर लाकर आंदोलन को देशव्यापी स्तर पर आगे बढ़ाने की बात कही गई। इस दौरान ‘भुगतान करो या सत्ता छोड़ो’ का नारा लगाते हुए निवेशकों की धनराशि वापस दिलाने के लिए सरकार से ठोस कार्रवाई की मांग की गई।
भुगतान होने तक संघर्ष जारी रखने का ऐलान
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे सूरज दीन विश्वकर्मा ने कहा कि निवेशकों को उनकी जमा पूंजी वापस दिलाने के लिए विभिन्न संगठनों को एकजुट किया जाएगा। उन्होंने आंदोलन को और व्यापक बनाने तथा भुगतान की मांग पूरी होने तक अनशन जारी रखने की बात कही।
लखनऊ से पहुंचे मुख्य अतिथि रमेश सिंह ने निवेशकों को भुगतान से जुड़ी कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी। उन्होंने BUDS एक्ट के प्रावधानों का उल्लेख करते हुए संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
हरियाणा से आए विशिष्ट अतिथि नरेंद्र प्रसाद ने भी निवेशकों के भुगतान का मुद्दा उठाया। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड से पहुंचे प्रतिनिधियों ने अपने विचार साझा करते हुए आंदोलन को मजबूत करने की अपील की।
26वें महीने में पहुंचा आंदोलन
आयोजकों के अनुसार, निवेशकों की जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन अब 26वें महीने में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने कहा कि जब तक निवेशकों की समस्याओं का समाधान नहीं होता, तब तक उनकी आवाज उठाने का प्रयास जारी रहेगा।
अधिवेशन में लंबित दावों पर कार्रवाई, पात्र निवेशकों को भुगतान और संबंधित कानून के प्रभावी क्रियान्वयन की मांग दोहराई गई। प्रतिनिधियों ने आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने और संबंधित अधिकारियों तक निवेशकों की समस्याएं पहुंचाने पर भी जोर दिया।
अधिवेशन में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में अंबिका प्रसाद, रामशरण दास, राकेश कुमार साहू, शिवबली प्रसाद, राजकुमार गुप्ता, अवधेश कुमार, राजू, सत्येंद्र कुमार, विजय कुमार, विनोद कुमार, रामऔतार, डॉ. इंद्रपाल, भोला, संजय विश्वकर्मा, रामकरन, डॉ. रामस्वरूप वर्मा, प्रदीप कुमार शर्मा, सतीश कुमार विश्वकर्मा, वंश गोपाल, प्रेमलाल, मोहम्मद कलीम, दीपक कुमार सैनी, जितेंद्र सिंह, लोकेश कुमार, हरिओम प्रजापति, बलरामचंद, राकेश कुमार, चंद्रभूषण, हिमाचल सिंह, नरेंद्र कुमार और बिंदा प्रसाद सहित विभिन्न राज्यों से आए पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।







