न्याय मांगने पहुंचे लोग खुद असुरक्षित, जर्जर भवन की खुली पोल; वीडियो सामने आने के बाद भी जिम्मेदारों की जवाबदेही पर सवाल
फतेहपुर। खागा में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले क्षेत्राधिकारी कार्यालय की अपनी ही इमारत सुरक्षा के लिए खतरा बन गई है। यहां न्याय की आस में पहुंचने वाले फरियादियों को अब शिकायत सुनवाई से पहले अपनी जान की चिंता करनी पड़ रही है। भवन का जर्जर छज्जा कभी भी बड़े हादसे को दावत दे सकता है।
सामने आए वीडियो में भवन की बदहाली साफ नजर आ रही है। छज्जे का प्लास्टर उखड़ चुका है, सरिया बाहर निकल आई है और ईंटें तक दिखाई देने लगी हैं। इसी दौरान कार्यालय के बाहर मौजूद दो फरियादियों के नजदीक मलबा गिरने की बात सामने आई है। गनीमत रही कि दोनों इसकी चपेट में आने से बच गए।
सवाल: हादसे के बाद ही जागेगा सिस्टम?
यह कोई सुनसान या बंद पड़ी इमारत नहीं, बल्कि ऐसा सरकारी कार्यालय है जहां रोजाना फरियादियों, पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों का आना-जाना लगा रहता है। ऐसे में जर्जर छज्जे के नीचे लोगों की आवाजाही जारी रहना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की हालत लंबे समय से खराब है। दीवारों में दरारें और बरसात में छत टपकने जैसी समस्याएं भी बनी हुई हैं। इसके बावजूद कार्यालय का संचालन जारी है।
जिम्मेदार कौन, जवाब कब मिलेगा?
लोगों का सवाल है कि यदि किसी फरियादी के सिर पर छज्जे का मलबा गिर जाता और जान चली जाती, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? क्या संबंधित विभाग ने कभी भवन की तकनीकी जांच कराई है? क्या जर्जर हिस्से को सुरक्षित करने के लिए कोई कदम उठाया गया है?
अब मांग उठ रही है कि भवन का तत्काल निरीक्षण कराकर खतरनाक हिस्से को सुरक्षित किया जाए और जरूरत पड़ने पर कार्यालय को दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाए।
न्याय की चौखट पर पहुंचे फरियादियों की सुरक्षा आखिर किसकी जिम्मेदारी है? यह सवाल अब खागा में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिम्मेदार अधिकारियों की कार्रवाई का इंतजार है।
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सच की बात, इंडिया वार्ता।








