![]()
गाजीपुर/फतेहपुर। जिले के फतेहपुर थाना क्षेत्र में इन दिनों खनन माफियाओं का बोलबाला है। परसेठा और लिलरा जैसे गांवों में अवैध मिट्टी खनन का ‘सिंडिकेट’ इस कदर हावी है कि प्रशासन की चुप्पी पर अब ग्रामीण सवाल उठाने लगे हैं। आलम यह है कि जेसीबी मशीनों से धरती का सीना चीरकर डम्फर और ट्राले दिन-रात सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे हुए हैं।
प्रमुख बिंदु: क्यों सुलग रहे हैं सवाल?
खेतों की बर्बादी: उपजाऊ मिट्टी की ऊपरी परत (Topsoil) को हटाकर उसे ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इससे किसानों की जमीन आने वाले समय में बंजर हो सकती है।
ध्वस्त होती सड़कें: भारी वाहनों (डम्फर/ट्रालों) की अनियंत्रित आवाजाही से ग्रामीण इलाकों की सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं।
राजस्व को चपत: बिना किसी वैध परमिट और रॉयल्टी के चल रहे इस कारोबार से सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का चूना लग रहा है।
‘महीनावारी’ का शोर: चर्चा है कि यह पूरा खेल एक प्रभावशाली व्यक्ति के संरक्षण में “महीनावारी सिस्टम” के जरिए चल रहा है, जिसके कारण पुलिस और संबंधित विभाग आंखें मूंदे हुए हैं।
“हमें किसी का डर नहीं” — बेखौफ खनन माफिया
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि खनन कार्य में लगे लोग इतने दबंग हैं कि वे खुलेआम कहते फिरते हैं कि उन्हें किसी अधिकारी या विभाग का डर नहीं है। गांवों के मुख्य चौराहों से गुजरने वाले डम्फर इस बात की गवाही दे रहे हैं कि यह कोई चोरी-छिपे होने वाला काम नहीं, बल्कि एक संगठित लूट है।
“अवैध खनन से न केवल पर्यावरण को नुकसान हो रहा है, बल्कि किसानों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। डम्फरों की वजह से धूल और बदहाल सड़कों ने जीना मुहाल कर दिया है।”
— क्षेत्रीय ग्रामीण
प्रशासन का पक्ष
जब इस संबंध में स्थानीय प्रशासन से बात की गई, तो उनका वही रटा-रटाया जवाब सामने आया कि “मामले की जांच कराई जाएगी और अवैध खनन पाए जाने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।” हालांकि, जमीन पर अभी तक कोई बड़ी कार्रवाई नजर नहीं आई है।
निष्कर्ष:
बड़ा सवाल यह है कि आखिर किसके इशारे पर गाजीपुर की मिट्टी को कौड़ियों के भाव बेचा जा रहा है? क्या जिला प्रशासन इन माफियाओं के सिंडिकेट को तोड़ने का साहस दिखाएगा, या ‘महीनावारी’ के खेल में किसानों की उपजाऊ जमीन ऐसे ही लुटती रहेगी?








