भैरवा गांव में तनाव: होली के जश्न में हुआ विवाद बना जानलेवा, सात नामजद आरोपियों पर मुकदमा दर्ज।
असोथर (फतेहपुर): मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना में जनपद के भैरवा गांव में फाग गायन के दौरान हुए विवाद में एक दलित मजदूर की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। आरोप है कि “धर्म के धुरंधरों” ने लाठी-डंडों से युवक पर इस कदर कहर बरपाया कि इलाज के दौरान उसकी सांसें टूट गईं। घटना के बाद से गांव में भारी तनाव है और सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
विवाद से मौत तक का घटनाक्रम
जानकारी के मुताबिक, भैरवा निवासी कुलदीप पासवान (30) पुत्र रामधनी बीते 5 मार्च को गांव में फाग की टोली के साथ गाते-बजाते पुराने मंदिर के पास पहुंचा था। वहां मौजूद कुछ लोगों से किसी बात को लेकर कहासुनी शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक हो गई।
हमला: आरोप है कि विवाद बढ़ने पर अमन तिवारी अपने साथियों के साथ लाठी-डंडों से लैस होकर पहुंचा और कुलदीप पर टूट पड़ा।
इलाज और मृत्यु: लहूलुहान कुलदीप को पहले जिला अस्पताल और फिर कानपुर रेफर किया गया, जहां 7 मार्च को उसने दम तोड़ दिया।
परिवार का हाल: मृतक की बहन अंजू ने बताया कि कुलदीप ही मजदूरी कर अपने बूढ़े माता-पिता का पेट पालता था। उसकी मौत से परिवार के सामने अंधेरा छा गया है।
पुलिसिया कार्रवाई: तीन हिरासत में
थाना प्रभारी धीरेंद्र ठाकुर ने बताया कि परिजनों की तहरीर पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की है। पुलिस ने गांव के ही प्रधान राकेश कुमार गुप्ता समेत सात नामजद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
नामजद आरोपी:
राकेश कुमार गुप्ता (प्रधान)
राजेंद्र तिवारी
अमन तिवारी
ब्रह्मभेष तिवारी
विपिन तिवारी
आशीष तिवारी
शिवा तिवारी
“अब तक तीन आरोपियों—राजेंद्र, राकेश और विपिन को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। फरार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। गांव में शांति व्यवस्था कायम है।” — धीरेंद्र ठाकुर, थाना प्रभारी
समाज के लिए कड़वा सवाल
जिस फाग और होली को आपसी भाईचारे का प्रतीक माना जाता है, वहां जातिगत विद्वेष ने एक बेगुनाह की जान ले ली। क्या हमारी सामाजिक समरसता इतनी खोखली हो चुकी है कि बात-बात पर लाठियां तंत्र और कानून से ऊपर हो जाती हैं?








