नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने लद्दाख के प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता और आंदोलनकारी सोनम वांगचुक को बड़ी राहत दी है। गृह मंत्रालय (MHA) ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है। सरकार का यह कदम लद्दाख में जारी तनाव को कम करने और बातचीत का रास्ता खोलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार का संकल्प: शांति, स्थिरता और सार्थक संवाद
गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि सरकार लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि सभी संबंधित पक्षों के साथ एक रचनात्मक और सार्थक बातचीत (Constructive Dialogue) को बढ़ावा दिया जा सके।
गृह मंत्रालय ने क्या कहा?
मंत्रालय ने अपने बयान में लद्दाख की सुरक्षा और विकास के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा:
“सरकार लद्दाख को सभी आवश्यक सुरक्षा उपाय प्रदान करने के अपने वादे पर अडिग है। हमें पूरी उम्मीद है कि इस क्षेत्र से जुड़े सभी संवेदनशील मुद्दे रचनात्मक जुड़ाव और संवाद के माध्यम से हल कर लिए जाएंगे।”
बातचीत के लिए ‘हाई-लेवल कमेटी’ का विकल्प
गृह मंत्रालय ने संकेत दिया है कि लद्दाख की मांगों और वहां के मुद्दों को सुलझाने के लिए उच्च-स्तरीय समिति (High-Level Committee) की व्यवस्था के साथ-साथ अन्य उपयुक्त मंच भी उपलब्ध हैं। सरकार चाहती है कि सड़कों पर प्रदर्शन के बजाय मेज पर बैठकर समाधान निकाला जाए।
पृष्ठभूमि: क्यों थे वांगचुक चर्चा में?
बता दें कि सोनम वांगचुक लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर ‘दिल्ली चलो’ पदयात्रा और अनशन कर रहे थे। उनकी हिरासत को लेकर देशभर में चर्चा थी, जिसे अब गृह मंत्रालय ने व्यापक जनहित और क्षेत्रीय शांति को ध्यान में रखते हुए समाप्त कर दिया है।








