प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के संभल जिले की एक मस्जिद में नमाजियों की संख्या सीमित करने के मामले में जिला प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि जिले के जिलाधिकारी (DM) और पुलिस अधीक्षक (SP) को लगता है कि मस्जिद में नमाजियों की संख्या बढ़ने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है, तो उन्हें अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए या अपना तबादला करा लेना चाहिए।
क्या है पूरा मामला?
संभल की एक मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए प्रशासन द्वारा केवल 20 लोगों की अनुमति दी गई थी। प्रशासन के इस प्रतिबंध के खिलाफ हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि यह धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
27 फरवरी का आदेश: कोर्ट ने क्यों जताई नाराजगी?
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पाया कि प्रशासन कानून का पालन कराने के बजाय पाबंदियों का सहारा ले रहा है। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा:
“अगर अधिकारी कानून का पालन कराने में सक्षम नहीं हैं और उन्हें भीड़ से कानून-व्यवस्था बिगड़ने का डर है, तो वे उस पद के योग्य नहीं हैं। उन्हें संभल से बाहर तबादला मांग लेना चाहिए।”
प्रशासनिक विफलता पर उठाए सवाल
अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पुलिस और प्रशासन का काम शांति बनाए रखते हुए नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना है, न कि डर के कारण उन पर प्रतिबंध लगाना। कोर्ट की यह मौखिक टिप्पणी सोशल मीडिया और कानूनी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।








