फतेहपुर (असोथर/थरियाव): क्या जिला प्रशासन और खनिज विभाग किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं? बांदा-मर्का मौरम घाट खंड संख्या-3 से निकलने वाले ओवरलोड डंपर अब सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे हैं। ताजा मामला असोथर थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक डंपर की टक्कर से कल्लू यादव (निवासी घनघौल) का दायां हाथ शरीर से कटकर अलग हो गया। युवक की हालत नाजुक है, लेकिन सिस्टम अब भी गहरी नींद में है।
🚨 खंड-3 की ‘ओवरलोडिंग’ का आतंक
सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो खंड संख्या-3 से निकलने वाले वाहनों में क्षमता से दोगुना मौरम लादा जा रहा है। मंगलवार को तिवारी पेट्रोल पंप के सामने जो मंजर दिखा, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। डंपर की रफ्तार इतनी बेकाबू थी कि सड़क पर घर्षण से चिंगारियां निकल रही थीं। टक्कर इतनी भीषण थी कि कल्लू यादव को संभलने तक का मौका नहीं मिला।
⚠️ क्या खनन माफियाओं के आगे नतमस्तक है प्रशासन?
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि मौरम घाटों पर नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं:
ओवरलोडिंग का खेल: आखिर कांटा (वे-ब्रिज) होने के बावजूद इतने भारी वाहन सड़कों पर कैसे आ रहे हैं?
अंधाधुंध रफ्तार: रिहायशी इलाकों और मोड़ पर भी इन डंपरों की गति कम नहीं होती।
असोथर नगर पंचायत की चिंता: समाजसेवी सूरज भान पाल ने कड़ा विरोध जताते हुए पूछा है कि आखिर प्रशासन इन बेलगाम डंपरों पर शिकंजा क्यों नहीं कस रहा?
📢 जनता का आक्रोश: “हाथ कटा है, अब क्या जान भी जाएगी?”
घटना के बाद इलाके में भारी तनाव है। थरियाव पुलिस ने घायल को अस्पताल तो भेज दिया, लेकिन सवाल वही है—क्या आरोपी डंपर और उस पर लदे ओवरलोड मौरम के मालिक पर कार्रवाई होगी? या फिर रसूख के दम पर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?








