फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में पुलिस की साख पर बट्टा लगाने वाले एक दरोगा पर गाज गिरी है। पुलिस अधीक्षक (SP) अभिमन्यु मांगलिक ने भ्रष्टाचार और विवेचना में गंभीर हेराफेरी के आरोप में राधानगर थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर (दरोगा) प्रज्ज्वल उपाध्याय को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। दरोगा पर आरोप है कि उन्होंने ‘आर्थिक साठगांठ’ के चलते असली गुनाहगार को बचाने के लिए दुर्घटना में शामिल ट्रैक्टर ही बदलवा दिया।
क्या है पूरा मामला?
पीड़ित अभिषेक सिंह ने एसपी को दी गई अपनी शिकायत में बताया कि एक सड़क दुर्घटना के मामले की जांच दरोगा प्रज्ज्वल उपाध्याय कर रहे थे। आरोप है कि दरोगा ने विपक्षी पक्ष से हाथ मिला लिया और केस को कमजोर करने की साजिश रची।
मामले में सबसे हैरान करने वाला मोड़ तब आया जब जांच में यह पाया गया कि:
ट्रैक्टर की अदला-बदली: दुर्घटना में जिस ट्रैक्टर से हादसा हुआ था, उसे कागजों और साक्ष्यों से हटाकर उसकी जगह दूसरा ट्रैक्टर खड़ा कर दिया गया।
साक्ष्यों से छेड़छाड़: विवेचना के दौरान जानबूझकर महत्वपूर्ण तथ्यों को नजरअंदाज किया गया ताकि असली आरोपी को क्लीन चिट दी जा सके।
भ्रष्टाचार के आरोप: पीड़ित का दावा है कि दरोगा ने विपक्षी पार्टी से मोटी रकम लेकर केस की पूरी दिशा ही बदल दी।
एसपी की कार्रवाई से विभाग में हड़कंप
पीड़ित द्वारा पेश किए गए ठोस सबूतों का संज्ञान लेते हुए एसपी अभिमन्यु मांगलिक ने इसे बेहद गंभीर अनुशासनहीनता और अपराध माना। उन्होंने बिना देरी किए दरोगा प्रज्ज्वल उपाध्याय को निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। एसपी की इस त्वरित कार्रवाई से महकमे के उन पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया है जो जांच में लापरवाही बरतते हैं।
“पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार और साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी नियम विरुद्ध कार्य करेगा, उस पर इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।” — पुलिस प्रशासन, फतेहपुर
जांच के घेरे में अन्य कर्मी
सूत्रों की मानें तो इस ‘ट्रैक्टर कांड’ में कुछ अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। दरोगा के निलंबन के बाद अब इस मामले की विभागीय जांच (Departmental Inquiry) भी बैठा दी गई है ताकि भ्रष्टाचार की जड़ों तक पहुँचा जा सके।








