नई दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने देश की आर्थिक स्थिति और रुपये की ऐतिहासिक गिरावट को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार किया है। राहुल गांधी ने चेतावनी दी है कि डॉलर के मुकाबले रुपये का 100 के करीब पहुँचना और इंडस्ट्रियल फ्यूल (औद्योगिक ईंधन) की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी महज आंकड़े नहीं, बल्कि आने वाली भीषण महंगाई के स्पष्ट संकेत हैं।
“चुनाव खत्म होते ही बढ़ेंगे तेल-गैस के दाम”
राहुल गांधी ने आशंका जताई कि सरकार वर्तमान में हो रहे विधानसभा चुनावों (पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल आदि) के कारण तेल की कीमतों को नियंत्रित रखे हुए है। उन्होंने आरोप लगाया कि:
“जैसे ही चुनाव संपन्न होंगे, सरकार पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) के दाम बढ़ाकर आम जनता की जेब पर सीधा डाका डालेगी।”
सरकार के पास अर्थव्यवस्था को संभालने की न तो कोई दिशा है और न ही कोई ठोस रणनीति।
आम आदमी और MSMEs पर पड़ेगा गहरा असर
कांग्रेस नेता ने सोशल मीडिया (X) पर पोस्ट साझा करते हुए गिरते रुपये और महंगे ईंधन के चार प्रमुख खतरों को रेखांकित किया:
उत्पादन और परिवहन महंगा होगा: कच्चे माल की लागत बढ़ने से सामान की ढुलाई और मैन्युफैक्चरिंग महंगी हो जाएगी।
MSMEs पर मार: छोटे और मध्यम उद्योग बढ़ती लागत का बोझ नहीं उठा पाएंगे और संकट में आ जाएंगे।
रोजमर्रा की चीजें होंगी महंगी: रसोई के सामान से लेकर अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतें आसमान छुएंगी।
शेयर बाजार पर दबाव: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FII) द्वारा पैसा निकालने से बाजार में अस्थिरता बढ़ेगी।
पश्चिम एशिया संकट और ऊर्जा सुरक्षा
राहुल गांधी ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों, विशेषकर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा खतरे में है। उन्होंने सरकार की विदेश नीति पर भी सवाल उठाए और कहा कि सरकार की ‘खोखली बयानबाजी’ (Empty Rhetoric) से जनता की थाली का संकट दूर नहीं होने वाला है।
राहुल गांधी का सीधा सवाल: “सवाल यह नहीं है कि सरकार क्या कह रही है, सवाल यह है कि आपकी थाली में क्या बचा है?”








