फतेहपुर। हुसैनगंज थाना क्षेत्र के असनी गांव में 29 अगस्त की रात हुए गोलीकांड में मनीष दुबे की मौत के बाद अब उनके परिजनों ने प्रशासन से सुरक्षा और आर्थिक सहायता की मांग उठाई है। मृतक के पुत्र वैभव दुबे ने जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर नामजद आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के साथ परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित कराने की गुहार लगाई है।
डीएम को दिए गए प्रार्थना पत्र में वैभव दुबे ने आरोप लगाया कि रात करीब 10 बजे उनके पिता मनीष दुबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उन्होंने अमन सिंह पुत्र मुन्नू सिंह और इन्द्रेश उर्फ मुन्नू सिंह को घटना में शामिल बताते हुए उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की मांग की है।
55 बीघा जमीन के विवाद का भी जिक्र
परिवार की शिकायत में गांव की करीब 55 बीघा भूमि से जुड़े पुराने विवाद को भी घटना की पृष्ठभूमि से जोड़कर बताया गया है। प्रार्थना पत्र के मुताबिक, श्री शिक्षा आश्रम स्कूल ट्रस्ट से संबंधित भूमि को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद और तनाव की स्थिति रही है। परिजनों का दावा है कि इसी विवाद को लेकर पूर्व में भी कहासुनी और विवाद की घटनाएं होती रही हैं।
हत्या के बाद परिवार को सुरक्षा का डर
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि घटना के बाद परिवार में भय का माहौल है। उनका कहना है कि संबंधित लोगों के प्रभाव को देखते हुए उन्हें अपनी सुरक्षा को लेकर आशंका बनी हुई है। इसी आधार पर परिवार ने प्रशासन से तत्काल सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग की है।
आर्थिक संकट का हवाला, 50 लाख मुआवजे की मांग
परिवार ने प्रार्थना पत्र में कहा है कि मनीष दुबे की मौत से परिवार का प्रमुख सहारा छिन गया है और उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मृतक के पुत्र ने शासन-प्रशासन से 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दिलाने तथा परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की है।
इसके साथ ही परिजनों ने परिवार की सुरक्षा के लिए पुलिस व्यवस्था और शस्त्र लाइसेंस दिए जाने की मांग भी प्रशासन के समक्ष रखी है।
अब निगाह प्रशासन की कार्रवाई पर है। परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर पुलिस जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और सुरक्षा व आर्थिक सहायता की मांग पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
नोट: यह खबर मृतक के परिवार की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों और की गई मांगों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।








