फतेहपुर के धाता कस्बे में बिना नोटिस निर्माण ध्वस्त करने का आरोप; अधिकारियों ने पट्टाधारकों, कानूनगो और लेखपाल के दर्ज किए बयान, रिपोर्ट हाईकोर्ट भेजने की तैयारी
फतेहपुर/धाता। धाता कस्बे में पट्टाधारक के निर्माण को कथित तौर पर बिना पूर्व नोटिस गिराए जाने का मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद बुधवार को प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ। न्यायिक अधिकारी की देखरेख में तहसील और जिला प्रशासन की टीम ने विवादित स्थल पर पहुंचकर पूरे प्रकरण की पड़ताल की और संबंधित पक्षों के बयान दर्ज किए।
बुधवार शाम करीब साढ़े पांच बजे हाईकोर्ट की जूनियर डिवीजन की न्यायिक अधिकारी सुभ्रा प्रकाश की देखरेख में जांच प्रक्रिया शुरू हुई। इस दौरान पट्टाधारकों के साथ कानूनगो और लेखपाल से भी पूछताछ कर निर्माण और पट्टे से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई गई। अधिकारियों ने मौके पर जांच के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट भेजने की बात कही।
न्यायिक निगरानी में हुई जांच, प्रशासनिक अमला रहा मौजूद
मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के दौरान जिला और तहसील स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। इनमें अपर जिलाधिकारी न्यायिक सुनील कुमार यादव, एसडीएम खागा अश्विनी पांडेय, सीओ रवि प्रकाश सिंह, तहसील प्रशासन के अधिकारी, पुलिसकर्मी और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी प्रवेंद्र कुमार शामिल रहे।
अधिकारियों के पहुंचने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। प्रशासनिक टीम ने संबंधित अभिलेखों और पक्षकारों से मिली जानकारी के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं को समझने का प्रयास किया।
बिना नोटिस निर्माण गिराने का पट्टाधारक ने लगाया आरोप
पट्टाधारक का आरोप है कि उसके निर्माण को बिना किसी पूर्व नोटिस के ध्वस्त कर दिया गया। इसी कार्रवाई को चुनौती देते हुए उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। न्यायालय में मामला पहुंचने के बाद अब प्रशासनिक स्तर पर जांच कराई गई है।
जांच के दौरान अधिकारियों ने पट्टाधारकों के अलावा राजस्व विभाग के कानूनगो और लेखपाल के बयान भी दर्ज किए। इस प्रक्रिया के जरिए पट्टे की स्थिति, निर्माण से संबंधित तथ्यों और की गई कार्रवाई के आधार को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया।
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट होगा पूरा मामला
फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों ने जांच से संबंधित रिपोर्ट हाईकोर्ट को भेजने की बात कही है। अब पूरे प्रकरण में राजस्व अभिलेखों, संबंधित पक्षों के बयानों और प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े तथ्यों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
मामले में आगे की स्थिति जांच रिपोर्ट और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर स्पष्ट होगी।
रिपोर्ट कुलदीप कुमार घाता







