सवालों के घेरे में खाकी की चुप्पी: आखिर किसके संरक्षण में दोबारा सक्रिय हुआ ‘लोकेटर’ नेटवर्क?
फतेहपुर (विशेष संवाददाता, असोथर)। उत्तर प्रदेश में अवैध खनन और परिवहन पर नकेल कसने के तमाम सरकारी दावों को फतेहपुर के मोरंग माफिया ने ठेंगे पर रख दिया है। कुछ दिन पहले जिस STF (एसटीएफ) के खौफ से माफिया खेमे में सन्नाटा पसर गया था, अब उसी इलाके में माफियाओं की ‘दबंगई’ दोगुनी रफ्तार से लौट आई है। बड़ा सवाल यह है कि आखिर एसटीएफ की पैनी नजर और कार्रवाई अचानक बंद क्यों हो गई?
🔴 ग्राउंड रिपोर्ट: वही तिरपाल, वही मिट्टी और वही ‘सेफ पास’
एसटीएफ की सक्रियता के दौरान जिले के अवैध खनन और ओवरलोडिंग के गढ़ों में हड़कंप मच गया था। संदिग्ध लोकेटर भूमिगत हो गए थे, लेकिन टीम के हटते ही हालात “वही ढाक के तीन पात” जैसे हो गए हैं।
नंबर प्लेट का खेल: ट्रकों पर मिट्टी, पेंट और तिरपाल का पुराना खेल फिर शुरू हो गया है ताकि कैमरे और अधिकारी पहचान न सकें।
हाईटेक लोकेटर: लोकेटर नेटवर्क अब पहले से ज्यादा संगठित हो चुका है। अधिकारियों की गाड़ी निकलते ही सूचना पलक झपकते माफियाओं तक पहुंच जाती है।
🔴 खतरे में पुल: कालिंदी का सीना छलनी
बाँदा जनपद के मर्का मोरंग खण्ड संख्या–3 से निकलने वाली ओवरलोड गाड़ियां अब बेखौफ होकर कौहन–असोथर यमुना पुल को रौंद रही हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इन भारी ट्रकों की वजह से पुल की मियाद खत्म हो रही है और कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। माँ कालिंदी का सीना छलनी कर माफिया अपनी तिजोरियां भर रहे हैं।
“STF की मौजूदगी में माफिया बिलों में छिपे थे, लेकिन अब सड़कों पर फिर से तांडव शुरू हो गया है। ऐसा लगता है जैसे पूरे सिस्टम की नब्ज इन्हीं माफियाओं के हाथ में है।” > — स्थानीय निवासी (गोपनीय)
⚠️ इंडिया वार्ता के तीखे सवाल
एसटीएफ की कार्रवाई अचानक ठंडी क्यों पड़ी? क्या ऊपर से कोई दबाव था या यह महज एक ‘दिखावटी’ रेड थी?
सूचना तंत्र किसका मजबूत? अधिकारियों के पहुंचने से पहले ही ट्रक और लोकेटर कैसे गायब हो जाते हैं?
यमुना पुल का जिम्मेदार कौन? अगर ओवरलोडिंग से पुल को नुकसान होता है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
📢 जल्द होगा बड़ा खुलासा!
इंडिया वार्ता न्यूज की टीम इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंच रही है। हम जल्द ही बताएंगे कि इन लोकेटरों के पीछे असली ‘आका’ कौन है और सफेदपोशों का इसे कितना संरक्षण प्राप्त है।
देखते रहिए, इंडिया वार्ता न्यूज… क्योंकि हम छिपाते नहीं, दिखाते हैं!








