असोथर (फतेहपुर)।
फतेहपुर जनपद के विकास खंड असोथर की ग्राम सभा ऐझी में भ्रष्टाचार का ऐसा ‘जाल’ बुना गया कि कागजों पर तो गांव चमक उठा, लेकिन धरातल पर विकास के नाम पर सिर्फ ‘धूल’ उड़ रही है। ग्रामीणों की भारी शिकायतों के बाद जिलाधिकारी रवीन्द्र सिंह ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। डीएम ने 10 फरवरी 2026 को मुख्य विकास अधिकारी (CDO) को तलब करते हुए इस पूरे ‘घोटाले’ की विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने का कड़ा फरमान जारी किया है।
भ्रष्टाचार की ‘ब्लूप्रिंट’: कैसे हुआ सरकारी धन का बंदरबांट?
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को दिए अपने हलफनामे में ग्राम प्रधान हेमसुता और उनके करीबियों पर सरकारी खजाने में सेंध लगाने के गंभीर आरोप जड़े हैं। शिकायत के मुख्य बिंदु किसी बड़े घोटाले की ओर इशारा करते हैं:
कागजों पर तालाब और हैंडपंप: गाटा संख्या 921 (विद्यालय की भूमि) के नाम पर सरकारी बजट निकाला गया। हैंडपंप रिबोर, नाली निर्माण और तालाब की खुदाई जैसे काम सिर्फ सरकारी फाइलों में दर्ज हुए, जमीन पर इनका नामोनिशान नहीं है।
मजदूरों का हक मारकर चली जेसीबी: मनरेगा, जो गरीबों को रोजगार देने की योजना है, उसमें मजदूरों की जगह जेसीबी मशीनों से गुपचुप तरीके से काम कराया गया और पैसा मिलीभगत कर डकार लिया गया।
500 जॉब कार्ड का रहस्यमयी अंत: आरोप है कि जब वर्ष 2022 में जांच की आंच शुरू हुई, तो खुद को बचाने के लिए ग्राम प्रधान ने रातों-रात करीब 500 मनरेगा जॉब कार्ड निरस्त करवा दिए। बड़ा सवाल यह है कि अगर काम ईमानदारी से हुआ था, तो कार्ड क्यों काटे गए?
ग्रामीणों की ललकार: “मुकदमा दर्ज हो, रिकवरी की जाए”
शिकायतकर्ता सौरभ सिंह, मानसिंह और राकेश ने दो टूक शब्दों में कहा है कि गांव के विकास के लिए आया पैसा कुछ रसूखदारों की जेब में चला गया। ग्रामीणों ने मांग की है कि केवल जांच न हो, बल्कि दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा जाए और गबन किए गए सरकारी धन की वसूली की जाए।
प्रशासनिक हड़कंप
जिलाधिकारी के सख्त आदेश के बाद विकास भवन से लेकर ग्राम पंचायत तक हड़कंप मचा हुआ है। अब सबकी निगाहें सीडीओ की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ऐझी के ‘भ्रष्टाचारी’ सलाखों के पीछे जाएंगे या जांच की फाइलें ठंडे बस्ते में दब जाएंगी।








