असोथर: ‘मौन’ सहमति या मजबूरी? मौरम माफिया के तांडव से कस्बे की सड़कें बनीं ‘डेथ जोन

रिपोर्ट: आदर्श सिंह (ब्लॉक संवाददाता, असोथर)

असोथर (फ़तेहपुर)। जनपद के असोथर क्षेत्र में खनन माफियाओं ने कानून और प्रशासन की नाक के नीचे खुलेआम तांडव मचा रखा है। खंड 3 से निकलने वाली अवैध मौरम का काला खेल अब सीधे कस्बे की मुख्य सड़कों पर दिखाई दे रहा है। स्थानीय निवासियों का गंभीर आरोप है कि बिना प्रशासनिक मिलीभगत और ‘मौन’ सहमति के, जल स्तर के भीतर से पोकलैंड मशीनों द्वारा यह अवैध खनन संभव नहीं है।

कस्बे के बीच दौड़ते ‘यमदूत’, मासूमों पर मंडराता खतरा

दिन हो या रात, असोथर कस्बे के मुख्य मार्गों से मौरम से लदे ओवरलोड डंपर और ट्रैक्टर-ट्रालियां अनियंत्रित गति से फर्राटा भर रहे हैं। रिहायशी इलाकों और बाजारों से गुजरते इन ‘यमदूतों’ के कारण स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और आम राहगीरों के लिए जान का जोखिम बना रहता है। हर क्षण यहाँ किसी बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल है।

खंड 3 में नियमों की ‘गहराई’ में डूबता प्रशासन

सूत्रों की मानें तो खंड 3 में निर्धारित सीमा से कहीं अधिक गहराई तक अवैध खुदाई की जा रही है। बिना वैध दस्तावेजों और रॉयल्टी की चोरी कर मौरम का परिवहन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की नाक के नीचे हो रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि सब कुछ सार्वजनिक होने के बावजूद अब तक कोई बड़ी ठोस कार्रवाई धरातल पर नजर नहीं आई है।

प्रमुख समस्याएं जो बनीं नासूर:

जर्जर सड़कें: ओवरलोड वाहनों के निरंतर आवागमन से कस्बे की सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं, जिससे आम जनता का चलना दूभर है।

धूल और प्रदूषण: दिनभर उड़ने वाली मौरम की धूल के गुबार से लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत हो रही है और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।

दिखावे के नाके: शिकायतों के बावजूद चेकिंग पॉइंट और नाकों पर सन्नाटा पसरा रहता है, जो माफियाओं को मिली खुली छूट का प्रमाण है।

जनता का तीखा सवाल: ‘साहब, किसका है संरक्षण?’

असोथर की जनता अब सीधे प्रशासन से सवाल पूछ रही है कि आखिर किसके रसूख और दबाव में इन माफियाओं को कानून की धज्जियां उड़ाने की अनुमति दी गई है? क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी या मासूम की जान जाने का इंतजार कर रहा है?

इंडिया वार्ता न्यूज़ (IVN) की विशेष रिपोर्ट: > “अवैध खनन की आड़ में पर्यावरण और जनसुरक्षा के साथ खिलवाड़ कब तक? भ्रष्टाचार की इस बहती गंगा में कौन-कौन हाथ धो रहा है, यह अब जांच का विषय है।”

 

 

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Author: India Varta News

Mohit Chakraborty is the Founder and Editor-in-Chief of India Varta News. He is actively involved in journalism and social service from Fatehpur, Uttar Pradesh. His mission is to deliver unbiased, factual, and public-interest journalism while highlighting local, regional, and national issues. He believes that media is a powerful tool for positive social change.

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