रिपोर्ट: पप्पू हाशमी, फतेहपुर
फतेहपुर। प्रदेश सरकार जहां आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों को प्रारंभिक शिक्षा, पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं विकासखंड देवमई की ग्राम पंचायत करनपुर कपरिया ऊसर में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र की स्थिति सरकारी दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों के अनुसार केंद्र लंबे समय से नियमित रूप से संचालित नहीं हो रहा, जिससे नौनिहालों की पढ़ाई और पोषण संबंधी गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अक्सर केंद्र से अनुपस्थित रहती हैं और अधिकांश दिनों में केंद्र बंद रहता है। केंद्र पर आने वाले मासूम बच्चे रोजाना समय से पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें घंटों तक केंद्र खुलने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार इंतजार के बाद भी केंद्र नहीं खुलता, जिससे बच्चों को मायूस होकर घर लौटना पड़ता है।
ग्रामीणों ने बताया कि आंगनबाड़ी केंद्र के बंद रहने से बच्चों को मिलने वाला पोषण, प्री-स्कूल शिक्षा और अन्य सरकारी सुविधाएं भी प्रभावित हो रही हैं। इससे बच्चों के सर्वांगीण विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी कई बार जिम्मेदार अधिकारियों को दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है और बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) और महिला एवं बाल विकास विभाग से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र को नियमित रूप से संचालित कराने और बच्चों को सरकार की योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने की अपील की है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि बच्चों की शिक्षा और पोषण से जुड़े इस गंभीर मामले पर प्रशासन कब संज्ञान लेता है और जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है। #हर_घर_शिक्षा_का_दावा_फेल
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