फतेहपुर। पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद साहब के यौमे पैदाइश के अवसर पर अखिल भारतीय असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस के प्रदेश कोऑर्डिनेटर मिस्बाहुल हक ने प्रदेशवासियों को मुबारकबाद दी। उन्होंने पर्व को अमन, भाईचारे और सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।
मिस्बाहुल हक ने कहा कि त्योहारों के दौरान राजनीतिक गतिविधियां और धार्मिक मंचों पर नेताओं की मौजूदगी बढ़ जाती है। ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि जब जनता रोजगार, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों से जूझती है, तब राजनीतिक नेतृत्व इन सवालों पर साल भर कितना सक्रिय रहता है।
उन्होंने कहा कि धर्म इंसान को इंसाफ, अमन, करुणा और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना सिखाता है, वहीं भारतीय संविधान समानता, स्वतंत्रता, गरिमा, धार्मिक स्वतंत्रता और न्याय को लोकतांत्रिक जीवन का आधार मानता है। इसलिए धर्म और संविधान को टकराव का विषय बनाने के बजाय इनके मूल्यों को राजनीति की कसौटी बनाया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धर्म आस्था का विषय है और राजनीति जनसेवा का। किसी भी धर्म, समुदाय या धार्मिक भावना का इस्तेमाल नफरत, भय, सामाजिक विभाजन अथवा वोटों के ध्रुवीकरण के लिए नहीं होना चाहिए। लोकतंत्र में किसी नेता की पहचान इस बात से होनी चाहिए कि वह गरीब, मजदूर, किसान, युवा, महिला और वंचित नागरिकों के अधिकारों के लिए कितना खड़ा होता है।
मिस्बाहुल हक ने कहा कि त्योहार जनता की खुशियों और सामाजिक सद्भाव के अवसर हैं, राजनीतिक प्रदर्शन के नहीं। आवश्यकता ऐसी राजनीति की है जो धार्मिक पहचान से ऊपर उठकर संविधान की मर्यादा, सामाजिक न्याय, समान भागीदारी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और नागरिक सम्मान को प्राथमिकता दे।
उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले सभी मजहब इंसान को इंसाफ और भाईचारे का संदेश देते हैं। संविधान प्रत्येक नागरिक को बराबरी का अधिकार देता है और राजनीति का दायित्व इन मूल्यों को जनसेवा में उतारना है। यही सामाजिक न्याय, सहअस्तित्व और मजबूत लोकतंत्र का आधार है।








