⚠️ विशेष रिपोर्ट: जाम तो सिर्फ झांकी है, यहाँ हर दिन मौत का तांडव बाकी है!
फतेहपुर। थरियाव तिराहे और असोथर क्षेत्र में सोमवार को लगा महाजाम महज़ एक यातायात समस्या नहीं है, बल्कि एक बड़े हादसे की आहट है। मर्का-बांदा खंड-3 से निकलने वाले ये ओवरलोड डंपर अब राहगीरों के लिए ‘साक्षात यमदूत’ बन चुके हैं। स्थानीय लोगों का दर्द है कि इस मार्ग पर प्रतिदिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन प्रशासन की कुंभकर्णी नींद टूटने का नाम नहीं ले रही।
📍 डेंजर जोन बना थरियाव-असोथर मार्ग 🛣️❌
ओवरलोडिंग के इस खेल ने असोथर और थरियाव क्षेत्र की सड़कों को मौत के जाल में बदल दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि:
रोजाना हादसे: भारी वाहनों की अनियंत्रित रफ्तार और क्षमता से अधिक लोड के कारण आए दिन बाइक सवार और राहगीर चोटिल हो रहे हैं। 🤕
धूल और गड्ढे: ओवरलोडिंग ने सड़कों का सीना छलनी कर दिया है। गहरे गड्ढों के कारण संतुलन बिगड़ना और पलटते डंपर यहाँ की नियति बन चुके हैं। 🚛💨
स्कूली बच्चों पर मंडराता खतरा: सोमवार के जाम ने साबित कर दिया कि मोरम माफियाओं के लिए बच्चों की जान की कोई कीमत नहीं है। घंटों जाम में फंसी स्कूल बसें किसी भी पल बड़े हादसे का शिकार हो सकती हैं। 🚌⚠️
🚔 डायल 112 और एंबुलेंस भी बेबस
हैरानी की बात है कि जो पुलिस (डायल 112) लोगों की सुरक्षा के लिए है, वह खुद माफियाओं के बनाए इस जाम के चक्रव्यूह में फंसी नजर आई। जब खाकी और बैंक की कैश वैन सुरक्षित नहीं है, तो आम आदमी की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा? 🏦🚓
❓ तीखे सवाल: आखिर किसका संरक्षण है?
स्थानीय जनता अब सीधे सवाल पूछ रही है:
खनिज विभाग की टीमें इन ओवरलोड डंपरों का कांटा (वजन) चेक क्यों नहीं करतीं? ⚖️
प्रतिदिन 300 डंपर अवैध रूप से सड़कों को रौंद रहे हैं, तो परिवहन विभाग (ARTO) कहाँ सोया है? 👮♂️
क्या प्रशासन किसी बड़े नरसंहार का इंतजार कर रहा है, तभी इन मोरम माफियाओं पर नकेल कसी जाएगी?
📢 वायरल वीडियो दे रहा गवाही 📱🎥
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा थारियाव तिराहे का वीडियो केवल जाम की तस्वीर नहीं, बल्कि फतेहपुर प्रशासन की नाकामी का जीवंत दस्तावेज है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इन ओवरलोड वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और सड़कों की मरम्मत नहीं हुई, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।








