फ़तेहपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों एक अजीब विरोधाभास देखने को मिल रहा है। एक तरफ समाजवादी पार्टी (सपा) उन वीडियो को उत्साह के साथ प्रचारित कर रही है जिनमें बच्चे पार्टी की जीत की दुआ मांग रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अपनी गायब बेटी की तलाश में दर-दर भटक रही एक माँ की पुकार नेताओं के कानों तक नहीं पहुँच पा रही है।
क्या है पूरा मामला?
फ़तेहपुर जिले के सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम घोषिन का पुरवा (मजरे खरगूपुर) से एक 17 वर्षीय किशोरी 3 नवंबर 2025 की रात से गायब है। परिजनों का आरोप है कि गांव के ही कुछ दबंग युवक उसे बहला-फुसलाकर भगा ले गए हैं।
पीड़ित माँ पिछले 10 दिनों से कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठी है। उसका कहना है कि:
थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद पुलिस कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है।
किशोरी की बरामदगी के बजाय उल्टा पीड़ित परिवार को ही धमकाया जा रहा है।
जिले का कोई भी सपा नेता या अन्य राजनीतिक प्रतिनिधि इस परिवार की सुध लेने नहीं पहुँचा।
सोशल मीडिया बनाम जमीनी हकीकत
खबर के अनुसार, हाल ही में लखनऊ में एक छोटी बच्ची ने सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात की और पार्टी की सरकार बनने की दुआ मांगी। सपा कार्यकर्ताओं ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर जमकर वायरल किया।
लेकिन सवाल यह उठता है कि जो नेता एक बच्ची की दुआओं को ‘पब्लिसिटी’ के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं, वे उसी जिले की एक दूसरी बेटी के गायब होने पर मौन क्यों हैं? क्या राजनीतिक दलों के लिए केवल वही बच्चे महत्वपूर्ण हैं जो उनके वोट बैंक या प्रचार में काम आ सकें?
भीम आर्मी ने दी आंदोलन की चेतावनी
इस मामले में प्रशासन की सुस्ती को देखते हुए भीम आर्मी के पूर्व जिलाध्यक्ष शिवकुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के आश्वासन के बावजूद अभी तक किशोरी का कोई सुराग नहीं लगा है। यदि जल्द ही बेटी की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई, तो वे मजबूरन बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।








