बांदा/फतेहपुर। उत्तर प्रदेश के बांदा और फतेहपुर जिलों के बीच मौरंग के काले खेल ने आम जनमानस का जीना मुहाल कर दिया है। बांदा जिले के मर्का खंड 3 स्थित मौरंग खदानों से निकलने वाले ओवरलोड डंफर, ट्रक और ट्रैक्टर न केवल नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहे हैं।
सड़कों पर मौत का तांडव, जिम्मेदार बेखबर
बांदा के मर्का से होकर मौरंग से लदे ये वाहन फतेहपुर जनपद के असोथर थाना क्षेत्र से प्रवेश करते हैं और थरियांव थाना क्षेत्र तक इनका निर्बाध संचालन जारी रहता है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि इन सड़कों पर 24 घंटे ओवरलोड वाहनों का कब्जा रहता है।
स्कूली बच्चों पर मंडराता खतरा: सुबह के समय जब स्कूली बच्चे सड़क पर होते हैं, तब ये भारी वाहन उनके लिए साक्षात यमराज बनकर दौड़ते हैं। संकरी सड़कों पर इन बेकाबू डंफरों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं।
धूल और प्रदूषण से बेहाल जनता: मौरंग ढोने वाले इन वाहनों से उड़ने वाली धूल ने वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है। सड़क किनारे रहने वाले लोगों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है और पेड़ों पर धूल की मोटी परत जम गई है।
करोड़ों की सड़कों का नुकसान: भारी ओवरलोडिंग के कारण हाल ही में बनी पक्की सड़कों का अस्तित्व खतरे में है। कई जगहों पर सड़कें धंस गई हैं, जिससे राहगीरों का चलना दूभर हो गया है।
बड़ा सवाल: आखिर मौन क्यों है प्रशासन?
हैरानी की बात यह है कि असोथर से लेकर थरियांव थाने तक के रूट पर दर्जनों पुलिस पिकेट और चौकियां होने के बावजूद इन वाहनों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है।
चेकिंग के नाम पर खानापूर्ति: क्या स्थानीय पुलिस और परिवहन विभाग (RTO) को ये ओवरलोड वाहन दिखाई नहीं देते?
कागजों तक सीमित कार्रवाई: यदि कभी कार्रवाई होती भी है, तो वह महज कुछ वाहनों का चालान काटकर इतिश्री कर ली जाती है।
मिलीभगत की आशंका: ग्रामीण दबी जुबान में आरोप लगा रहे हैं कि खनन माफिया और जिम्मेदार अधिकारियों के बीच ‘सांठगांठ’ के चलते ही यह अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।








