
रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी (कानपुर ब्यूरो चीफ)
कानपुर। शहर के केशवपुरम स्थित एक निजी अस्पताल में हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले ने स्वास्थ्य विभाग से लेकर पुलिस प्रशासन तक हड़कंप मचा दिया है। इस “किडनी कांड” में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जहां एक तरफ किडनी देने वाला डोनर आयुष चौधरी रहस्यमयी चुप्पी साधे हुए है, वहीं दूसरी तरफ रिसीवर पारुल तोमर का पति उसे मौत के मुँह में छोड़कर लापता हो गया है।

डोनर आयुष का ‘MBA’ कनेक्शन निकला फर्जी?
बिहार निवासी डोनर आयुष चौधरी ने आखिर अपनी किडनी क्यों बेची, यह सवाल अब भी अनसुलझा है। पूछताछ में आयुष ने केवल इतना कहा कि “पैसों की जरूरत सबको होती है”। पहले चर्चा थी कि उसने एमबीए की फीस भरने के लिए किडनी बेची, लेकिन देहरादून से आई उसकी महिला मित्र ने इस दावे की हवा निकाल दी। उसने खुलासा किया कि आयुष पहले ही एमबीए पूरा कर चुका है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला के सामने भी आयुष ने कोई ठोस जानकारी साझा नहीं की, जिससे किसी बड़े नेटवर्क की ओर शक की सुई घूम रही है।

पत्नी को अस्पताल में छोड़ पति विकास तोमर फरार
मुजफ्फरनगर की 43 वर्षीय पारुल तोमर की हालत हैलट अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग में नाजुक बनी हुई है। पारुल के भाई दिव्यांक ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पारुल के पति विकास तोमर ने परिवार को बिना बताए धोखे से उसे कानपुर भेजा। ऑपरेशन के बाद से ही विकास का फोन बंद है और वह फरार है। परिवार का आरोप है कि उन्हें किडनी ट्रांसप्लांट की जानकारी तक नहीं दी गई थी।

आधी रात को हुआ ऑपरेशन, सुरक्षा मानकों की उड़ी धज्जियां
जांच में सामने आया है कि 29 मार्च की रात 11 बजे से तड़के 3 बजे तक यह संदिग्ध ऑपरेशन चला। परिजनों के अनुसार, गंभीर ऑपरेशन के बाद मरीज को कायदे से 48 घंटे आईसीयू में होना चाहिए था, लेकिन डॉक्टरों ने उसे तुरंत सामान्य कमरे में शिफ्ट कर दिया। पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान जानबूझकर सीसीटीवी बंद कराए गए और स्टाफ को मौके से हटा दिया गया था, जो कि साजिश का सीधा प्रमाण है।

फरार डॉक्टरों पर लुकआउट नोटिस, देशभर में छापेमारी
कानपुर पुलिस ने इस कांड में शामिल मुख्य आरोपियों— डॉ. अफजाल, डॉ. रोहित, डॉ. वैभव और डॉ. अनुराग उर्फ अमित के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी कर दिया है ताकि वे देश छोड़कर न भाग सकें।
दबिश: नोएडा, मेरठ और देहरादून समेत कई शहरों में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
वित्तीय जांच: आरोपियों के बैंक खातों और लेन-देन की बारीकी से जांच की जा रही है, जिसमें आयकर विभाग की मदद भी ली जा रही है।
बड़े रैकेट की आशंका
अस्पताल संचालक समेत कई लोग पहले ही जेल जा चुके हैं। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह सिर्फ एक केस है या कानपुर में मानव अंगों की तस्करी का कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।
प्रकाशन: इंडिया वार्ता न्यूज़








