रिपोर्ट: राहुल द्विवेदी (कानपुर ब्यूरो चीफ)
लखनऊ/कानपुर। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में लंबे इंतजार के बाद पदोन्नति का बड़ा पिटारा खुला है। 1998 बैच के 123 इंस्पेक्टरों को प्रमोट कर डिप्टी एसपी (सीओ) बनाया गया है। हालांकि, इस खुशी के बीच एक ऐसी भावुक और हैरान करने वाली स्थिति सामने आई, जिसने पुलिस महकमे के सिस्टम पर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की मुहर
बीती 24 मार्च को हुई डीपीसी की बैठक के बाद 31 मार्च को शासन द्वारा आधिकारिक आदेश जारी किए गए। इस पदोन्नति सूची में:
नागरिक पुलिस के 109 अधिकारी शामिल हैं।
प्रतिसार निरीक्षक, कंपनी कमांडर और ट्रैफिक पुलिस के 14 अधिकारियों को भी प्रमोशन का तोहफा मिला है।
अजीब इत्तेफाक: सुबह पदोन्नति, शाम को विदाई
इस पूरी प्रक्रिया की सबसे चर्चित कड़ी रहे वे चार इंस्पेक्टर— कृष्ण कुमार मिश्रा, विनोद कुमार पायल, देवी चरण और सुशील कुमार— जिन्हें सेवा के बिल्कुल अंतिम दिन (31 मार्च) डिप्टी एसपी पद पर प्रमोट किया गया। विडंबना यह रही कि जिस दिन उनके कंधे पर तीन स्टार (DSP रैंक) लगने का आधिकारिक आदेश आया, उसी दिन वे सेवामुक्त (रिटायर) भी हो गए।
इन अधिकारियों को इतना समय भी नहीं मिल सका कि वे डिप्टी एसपी की नई वर्दी सिलवा सकें या नए पद की जिम्मेदारियों को संभाल सकें। करियर के आखिरी दिन मिला यह सम्मान जहां एक ओर गर्व का विषय है, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की सुस्त रफ्तार को भी उजागर करता है।
पुलिस महकमे में मिली-जुली प्रतिक्रिया
प्रमोशन का आदेश जारी होने के बाद विभाग में खुशी का माहौल है और प्रमोट हुए अधिकारियों को बधाई देने वालों का तांता लगा है। लेकिन ‘रिटायरमेंट के दिन प्रमोशन’ की इस घटना ने महकमे के भीतर एक नई बहस छेड़ दी है। चर्चा है कि यदि प्रक्रिया कुछ समय पहले पूरी हो जाती, तो इन अनुभवी अधिकारियों की सेवाओं का लाभ नए पद पर भी लिया जा सकता था।
प्रकाशन: इंडिया वार्ता न्यूज़








