असोथर (फतेहपुर)। जिले की विकासखंड असोथर अंतर्गत सरकंडी ग्राम सभा एक बार फिर भ्रष्टाचार के आरोपों के घेरे में है। विकास कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिलाधिकारी रविंद्र सिंह ने ग्राम प्रधान पुष्पा द्विवेदी को करीब एक करोड़ रुपये के संदिग्ध खर्च पर कारण बताओ नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।
जांच रिपोर्ट में खुली पोल: ₹1 करोड़ के खर्च पर संदेह
मिली जानकारी के अनुसार, गांव में मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन, राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग से मिली करोड़ों की धनराशि के उपयोग की जांच चल रही थी। परियोजना निदेशक (ग्राम्य विकास) की विस्तृत जांच रिपोर्ट में लगभग एक करोड़ रुपये के खर्च को संदिग्ध माना गया है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि कागजों पर दिखाए गए विकास कार्य और धरातल की स्थिति में बड़ा अंतर है।
DPRO बोले- साक्ष्यों के साथ देना होगा जवाब
जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) रामशंकर वर्मा ने बताया कि:
“परियोजना निदेशक की जांच आख्या के आधार पर पूरी पत्रावली जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत की गई थी। पंचायत राज अधिनियम के तहत ग्राम प्रधान को नोटिस जारी कर संदिग्ध खर्चों पर साक्ष्य सहित जवाब मांगा गया है। 15 दिन के भीतर संतोषजनक जवाब न मिलने पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।”
पुराना है ‘घोटालों’ से नाता
यह पहली बार नहीं है जब सरकंडी ग्राम सभा विवादों में है। इससे पहले भी मनरेगा घोटाले को लेकर यहाँ मुकदमा दर्ज किया जा चुका है। खंड विकास अधिकारी (BDO) राहुल मिश्रा ने पुष्टि की कि नोटिस की प्रति पंचायत सचिव के माध्यम से ग्राम प्रधान को रिसीव करा दी गई है।
ग्राम प्रधान का पक्ष: “धनराशि जनहित में हुई खर्च”
वहीं, आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्राम प्रधान पुष्पा द्विवेदी ने खुद को पाक-साफ बताया है। उन्होंने कहा कि ग्राम सभा को मिली पाई-पाई का हिसाब मौजूद है और सारा पैसा जनहित के कार्यों में ही लगाया गया है। उन्होंने तय समय सीमा के भीतर नियमानुसार जवाब दाखिल करने की बात कही है।
ब्यूरो रिपोर्ट: इंडिया वार्ता न्यूज़ (फतेहपुर)








