कहीं नाला पटा तो कहीं तालाब उफनाया, जलभराव से ग्रामीण बेहाल; प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग
फतेहपुर। लगातार हो रही बारिश ने जिले के ग्रामीण इलाकों में जल निकासी व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने ला दी है। भिटौरा विकासखंड की ग्राम पंचायत मलाका में नाले पर कथित अवैध कब्जे से जल निकासी बाधित होने का आरोप सामने आया है, वहीं विजयीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पहाड़पुर में तालाब का पानी उफनाकर आबादी और घरों तक पहुंच गया है। दोनों गांवों की स्थिति ने नालों, तालाबों और जल निकासी व्यवस्था को लेकर किए जाने वाले विकास कार्यों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मलाका में नाला पाटकर कब्जे का आरोप
मलाका में ग्राम प्रधान शिवाकांत मिश्रा ने उप जिलाधिकारी को शिकायती पत्र देकर नाले और पुलिया से कथित अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है। शिकायत के मुताबिक गांव में पूर्व में जगदीश रैदास के घर से तालाब तक नाला और पुलिया बनी थी। आरोप है कि कुछ लोगों ने नाले को पाटकर उस पर कब्जा कर लिया, जिससे बारिश का पानी निकलने का रास्ता बाधित हो गया।
जल निकासी प्रभावित होने के कारण बारिश के दौरान पानी घरों और रास्तों पर भर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक जलभराव से आवागमन मुश्किल हो जाता है और स्कूली बच्चों सहित राहगीरों को गंदे पानी के बीच से गुजरना पड़ता है। लंबे समय तक पानी जमा रहने से संक्रमण और बीमारियों का खतरा भी बना हुआ है।
ग्राम प्रधान ने प्रशासन से नाले की भूमि की जांच कराने, कथित कब्जा हटवाने तथा नाले और पुलिया को दुरुस्त कराने की मांग की है।
पहाड़पुर में तालाब का पानी घरों तक पहुंचा
उधर विजयीपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत पहाड़पुर में भारी बारिश के बाद तालाब का पानी उफनाने से कई घरों में पानी घुस गया। ग्रामीणों का कहना है कि जल निकासी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण तालाब का पानी आबादी की ओर पहुंच रहा है।
घर के अंदर पानी भरने से ग्रामीणों को सामान सुरक्षित रखने के साथ-साथ मकानों की सुरक्षा की चिंता भी सताने लगी है। कमजोर और कच्चे मकानों को लेकर लोगों में भय है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
25 साल का विकास बारिश में बहता नजर आया!
पहाड़पुर की स्थिति ने ग्राम पंचायत में वर्षों से कराए जा रहे विकास कार्यों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि लंबे समय से विकास कार्य होने के बावजूद हर बारिश में जलभराव की समस्या जस की तस बनी हुई है, तो स्थायी जल निकासी व्यवस्था आखिर क्यों नहीं बन सकी?
वहीं मलाका में नाले पर कब्जे का आरोप और पहाड़पुर में तालाब के पानी का आबादी में पहुंचना यह सवाल खड़ा करता है कि क्या गांवों में जल निकासी के प्राकृतिक और पुराने रास्तों की नियमित निगरानी होती है?
बड़ा सवाल—समस्या का समाधान या सिर्फ बरसात का इंतजार?
दोनों गांवों के हालात प्रशासन के सामने एक जैसी चुनौती खड़ी कर रहे हैं—बारिश के पानी की निकासी आखिर होगी कैसे?
ग्रामीणों ने तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराने, प्रभावित घरों का निरीक्षण करने, नालों और तालाबों की स्थिति की जांच कराने तथा जहां भी सरकारी भूमि या जल निकासी मार्ग पर कब्जे की शिकायत है, वहां नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रखता है या मौके पर जांच कर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था कराता है। क्योंकि पानी उतरने के बाद समस्या भले दिखाई देना बंद हो जाए, लेकिन अगली बारिश में यही सवाल फिर खड़ा होना तय है।








