सरकारी अस्पतालों में नकली दवाएं और दलालों का राज होने के आरोप
फतेहपुर। जनपद की चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं का मुद्दा अब विधानसभा तक पहुंच गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा नियमावली के नियम-56 के तहत विधानसभा अध्यक्ष को भेजी गई संयुक्त सूचना में चंद्र प्रकाश लोधी (फतेहपुर सदर विधायक) और ऊषा मौर्य (हुसैनगंज विधायक) ने जिले के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं।
पत्र में आरोप लगाया गया है कि फतेहपुर के सरकारी अस्पतालों में मेडिकल सप्लाई कॉरपोरेशन के माध्यम से नकली एवं घटिया गुणवत्ता की दवाएं सप्लाई की जा रही हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जिला अस्पताल से लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक दवाओं और आवश्यक उपकरणों की भारी कमी बताई गई है।
विधायकों ने यह भी कहा कि फतेहपुर मेडिकल कॉलेज में एमआरआई और डायलिसिस जैसी जरूरी मशीनें उपलब्ध नहीं हैं। कई फैकल्टी पद रिक्त हैं, जिसके चलते मेडिकल कॉलेज केवल “रेफर सेंटर” बनकर रह गया है। गंभीर मरीजों को इलाज के लिए कानपुर और प्रयागराज भेजा जा रहा है, जिससे समय पर उपचार न मिलने का खतरा बना रहता है।
पत्र में जिला अस्पताल परिसर में दलालों की सक्रियता पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि ऑपरेशन, भर्ती और दवाओं के नाम पर मरीजों से मोटी रकम वसूली जा रही है। बिना दलालों के माध्यम से संपर्क किए मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ता है।
हथगाम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की स्थिति को भी चिंताजनक बताया गया है। प्रसूता महिलाओं के लिए अलग वार्ड और आवश्यक उपकरणों का अभाव होने से मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर संकट की बात कही गई है। साथ ही National Health Mission (NHM) फंड के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए गए हैं।
दोनों विधायकों ने इस विषय को “अति अविलंबनीय लोक महत्व” का बताते हुए विधानसभा में तत्काल चर्चा और कार्यवाही स्थगित कर बहस कराने की मांग की है, ताकि फतेहपुर की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकें।








