फतेहपुर। जिले की ऐझी ग्राम सभा में विकास कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। शिकायतकर्ता एवं ग्रामीणों ने जांच के लिए पहुंची अधिकारियों की टीम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच न होने का आरोप लगाया है।

ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत में नाली, खड़ंजा, मनरेगा, रीबोर सहित विभिन्न विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि इन कार्यों में लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक के सरकारी धन के दुरुपयोग की शिकायत शासन और प्रशासन से की गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन के निर्देश पर जांच टीम गठित कर गांव भेजी गई।
शिकायतकर्ता शौरभ सिंह चौहान ने आरोप लगाया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर गठित जांच टीम से ग्रामीणों को निष्पक्ष जांच की उम्मीद थी, लेकिन टीम गांव पहुंचने के बाद सीधे प्रधान के आवास पर चली गई। उनका कहना है कि जांच अधिकारियों को गांव के विभिन्न स्थानों और लाभार्थियों के घर-घर जाकर भौतिक सत्यापन करना चाहिए था, जिससे वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के दौरान शिकायतकर्ताओं और अन्य ग्रामीणों से पर्याप्त बातचीत नहीं की गई, जबकि प्रधान पक्ष के लोगों की मौजूदगी में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की गई। इससे ग्रामीणों में असंतोष और नाराजगी का माहौल है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो वे मामले को उच्च स्तर तक ले जाएंगे। शिकायतकर्ता ने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर मुख्यमंत्री से शिकायत की जाएगी तथा न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा।
वहीं ग्राम प्रधान के पति सुरेंद्र कुमार द्विवेदी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि यह मामला चुनावी रंजिश से प्रेरित है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत में कराए गए विकास कार्य धरातल पर मौजूद हैं और गांव के लोग इसकी पुष्टि कर सकते हैं। उनका कहना है कि यदि विकास कार्य नहीं हुए होते तो इतनी संख्या में ग्रामीण उनके समर्थन में सामने नहीं आते।

फिलहाल, जांच को लेकर गांव में चर्चाओं का दौर जारी है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।








